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29.8.10

एक ख्वाब

बचपन से थी ख्वाईश मन की,
शीघ्र हो विवाह संपन्न !
सुंदर,गोरी,सुकोमल कन्या,
मचाये जो सबके ह्रदय में कम्पन्न!!

आंखें उसकी बिल्लौरी जैसी,
मखमल जैसे हो गाल!
सुंदर मोहक चेहरे पर,
दम बिखरे हुए बाल!!

पूछे आकर शहर ये सारा,
कहाँ से लाए हीरा प्यारा!
मंद-मंद मुस्का कर बोले,
ऊपरवाला  किस्मत खोले!!

और होगा सफल ये जीवन पूरा,
रहे गर न ये ख्वाब अधूरा!
लेकर सात फेरे संग,
मेरे जीवन में तुम भर दो रंग!!

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