पत्नी पर दोहे
पर-उपकार करी करी जग मुआ, सेवक भय न कोय...
खुश कर ले जो पत्नी को, वही तो सेवक होए!!
जाने-अनजाने में, गल्ती कोई जो कीजिए...
चरण-पकड़ शीघ्र आप, क्षमा दान लीजिए!!
अपनी-अपनी सब कहे, हमारी सुने न कोए...
डाट-डपट के बीच में, प्रेम कहाँ से होए!!
प्रेमिका-पत्नी दोउ खड़े, किसको गले लगाए...
पहली कष्ट देत है, दूजी देये रुलाये!!
पाप हरे, संकट मिटे, ऐसा कुछ दीजिए..
वरदान में आप हमे : आज़ाद फिर से कीजिए!!
lagta hai Patni se bahut darte hai aap...
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