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28.5.26

आफत

 

पतियों कि जान को, आफत नई आई

24 घंटे / 7 दिन, दिखती सिर्फ लुगाई,

 

रोना जी भर तो दूर, अब सिसिकना भी मुश्किल

करोना कर गया मजबूर, कहीं खिसिकना भी मुश्किल,

 

पहले थी आज़ादी खुलकर जीने की

भवरों सा मंडराकर, मधु-रस पीने की,

 

आती है रुलाई, मुझको बंद दीवारों में

 बुलबुल नहीं चहकती,बागियाँ और बाज़ारों में,

 

महामारी ये हौले से देखो कितनी विकराल हुई

धैर्य शक्ति पतियों की विकसित कितनी कमाल हुई,

 

मुहँ बंद आँख खुली बस इतनी सी पहचान रही

पत्नी-भय से ग्रसित, पड़ोसन भी यह जान गयी,

 

कलयुग में प्रभु, देखो कैसे हम बेहाल हुए

बिन पेंदे के लोटे और पिटे हुए थाल हुए,

 

कृपा हम पर जल्दी से, मालिक मेरे बरसाओ,

लॉक डाउन खुलवा कर,जीवन पह्लसे सा करवाओ !!

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 



14.5.26

कोई दीवाना PART 3

 

 

कसम खाएं खुदा कि या, तारे तोड़ कर लाएं

बहुत प्यारी हो तुम, तुम्हे कैसे ये समझाएं

कहने कि तमन्ना थी मेरे दिल में ये कबसे

मगर सोचा कहीं सुनकर कोई रूठ न जाए !

 

हुस्न की बात चले जब, तेरा चेहेरा ही दिखता है

करीब आए तू मेरे जब, मुझे पहेरा ही दिखता है

रहती है मेरे दिल में धडकनों से तू घुल-मिल कर

कोई चाहे न चाहे, जुदा हम हो नहीं सकते !

 

कि टुकड़ा चाँद का एक, बहुत प्यारा मिला मुझको

सितारों से करू तुलना या गुलाब कहूँ तुझको

चहकती है मेरे घर में कोई बुलबुल की तरह तू

मै बस इतना ही बोलू...I love YOU; I love YOU...

 

कोई दीवाना कहता है,कोई पागल समझता है

मगर धरती की बेचैनी को एक बादल समझता है

तू मुझसे दूर कैसी है.. मै तुझसे दूर कैसा हूँ..

ये तेरा दिल समझता है..या मेरा दिल समझता है !!



                                                                     समर्थ 

                                                                      15-03-26