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24.4.25

याद

 


याद हमें, तुम आओगे,

हमको बहुत, रुलाओगे

ज्ञात नहीं था,मोल तुम्हारा..

यूँ "तारा" बन,अनमोल हो जाओगे।

याद हमें,तुम आओगे..!!


घर में, सबसे छोटे थे,

क्यों, आगे-आगे चल दिए..

यात्रा को, अंतिम अपनी,

बिन कहे, निकल लिए..

नहीं, उचित नहीं था, निर्णय यह ..

घाव अनगिनत, दे जाओगे।

याद हमें, तुम आओगे..!!


बहन-बहनोई, भाभी-भईया,

सब देखते रह गए !

मम्मी-पापा की, गोद से निकल

क्यों गंगा में, समां गए

धैर्यवान, तुम सदा से थे..

क्यों, व्याकुल से हो जाओगे!

 याद हमें, तुम आओगे..!


ऋचा के नहीं, अनुज थे मेरे

इतना वक़्त, तो दे देते,

प्राण-रक्षा के कुछ प्रयास,

हम सब भी कर लेते..

ह्रदय-घात के साथ, तुम यूँ..

चिर-निद्रा में सो जाओगे।

याद हमें, तुम आओगे..!


'नीतिका' के अभिमान, थे तुम

देवस्य की मुस्कान, थे तुम

मानवीय गुणों से परिपूर्ण,

एक सरल-सीधे इंसान, थे तुम

श्रद्धा सुमन करते हैं, अर्पण तुमको,

 मोक्ष शीघ्र ,तुम पाओगे!

याद हमें, तुम आओगे..!

                                                                                                                        ऋचा-समर्थ

मुझे तुम दूसरी वाली दो (गीत)



अरे ऐसी दी सौगात,जो माने नहीं कोई बात

लेने जिसे,लाया था बारात,ससुर जी दूसरी वाली दो

  मुझे तुम दूसरी वाली दो !!


ये लड़की भोली-भाली ,जैसे गाय सींगो  वाली 

मुझे नहीं खानी है लात,ससुर जी दूसरी वाली दो 

  मुझे तुम दूसरी वाली दो !!


सूरत से बड़ी प्यारी,मगर जुबान जैसे कटारी

अरे सब-पर पड़े ये भारी, ससुर जी दूसरी वाली दो 

  मुझे तुम दूसरी वाली दो !!


अरे भूख लगे न प्यास,मन रहे उदास

लाए दामाद या फिर दास, ससुर जी दूसरी वाली दो 

  मुझे तुम दूसरी वाली दो !!


सुनलो मेरी पुकार, आए देखते ही बुखार 

परमानेंट यही इलाज,ससुरजी दूसरी वाली दो 

  मुझे तुम दूसरी वाली दो !!

                                                                                                                             

                                                                                                                समर्थ

                                                                                                             15-03-25

सिल्वर जुबली

 


जब से देखा है तुझको मेरा ये दिल मचलता है

भोली सी इस सूरत पर न जाने क्यों फिसलता है,

भुला कर सबको मैंने बस..रखा याद है तुमको

मिला कर नज़रों से नज़रें..क्यूँ न हम खो जाए !!


जो तुम रूठों..जग रूठा, मुझे ऐसा ही लगता है

सदा हस्ता हुआ चहेरा मेरी आँखों को जचता है,

सताने में तुझे जो है मज़ा वो, कह नहीं सकते..

मोहब्बत का हर एक रंग, तेरे होठों पर फबता है !!


सालों ने नवाज़ा है मुझे इज्ज़त से इतनी जो

बेहद प्यारा था उनको..दिया साथी है मुझको वो,

देकर के मुझे एक गुल, वो आखिर बच नहीं सकते

गुलिस्तां जो उनका है..वो भी अब हमारा है !!


खुदा ये रात सारी..यूहीं आँखों में कट जाए,

दिलों पे छाई बदली, ग़मों की वो भी छट जाए

तुम्हें पानें की ख्वाइश थी मेरी सो,पा लिया तुमको..

यहीं ख्वाइश है मेरी अब..कि एक साली भी पट जाए !!


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है..

मगर धरती की बेचैनी को एक बादल समझता है

तू मुझसे दूर कैसी है.. मै तुझसे दूर कैसा हूँ..

ये तेरा दिल समझता है..या मेरा दिल समझता है !!


                                                               समर्थ

                                                                08-12-23