एक सास ..
आई बहु के पास,
बोली,क्यूँ है उदास?
थोडा सज-सवर ले
बालों को दाये कन्धों पर करले
शाम को आ रहे है जीजा
यह सुन सलहज का मन रीझा !
सलहज फिर भी सकुचाई सी,
ख़ुशी की झलक,होठों तक आई थी
सोंच समझ कर,चतुराई से
पूछा बहु ने,ननद की माई से
जब कान्हां रास रचाते थे
क्या रुक्मणि को साथ लाते थे ?
भावनाओं को भांप कर,
सास बोली शब्दों को नापकर..
कान्हां लीलाधर थे,बांसुरी के मधुर स्वर थे,
प्रेम की डोर से न जाने कितनी गांठे लगाई थी,
कान्हां किसी के सखा-सारथी और सुभद्रा के थे
भाई,
पर तेरे नन्दोई,सिर्फ और सिर्फ मेरे है जमाई..
कुछ बात समझ में आई !!
घमासान..
एक बार की बात है,घमासान छिड़ गया
साले से,मेरा साढू भीड़ गया
बोला-तेरी बहन और घरवाली
दोनों जीजा पर मरती है,
उनके आने की खबर सुन
रूप नए धरती है !
ख़ुशी के मारे फूली नही समाती
भांति-भांति के पकवान प्रेम से बनाती !
साढू की अकड़ देख,साला भी क्रोध से लाल हुआ
देखिये मुझ पर खामखाँ न गरमाए
पहले अपनी वाली को समझाएं
मेरी तो
बहुत ही भोली और सलोनी है
जब जीजू तारीफ करते,तभी
वो इतराती है
और प्यार से उसे देखें, तो शर्माती है..
वो बेचारी मोठ,तो जीजा है मसूर
देखियें जी, इसमें
मेरा नहीं कसूर !!
तुक्कम
तुक्का
बुआ-सास,बहुत ही ख़ास,
पूछों क्यों ?
हम बताएँ यों..
दोनों भाई मिलकर दे पाए,
सिर्फ और सिर्फ एक साली
और बुआ-सास ने अकेली ही
देखिये hat-trick लगा डाली !!
दामाद
दामाद का उदास चेहेरा
मानो दहशतों का हो पहेरा
उखड़े हुए बाल, सूखी-सूखी खाल
देखिए,सिर्फ
एक का ही कमाल
देख दामाद का ये हाल..
ससुर जी निकाल लाए रुमाल !
भावुक स्वर में बोले,हिम्मत धरो
इन व्यर्थ बातों से ना डरो
छुरी की धार समय के साथ होती है कुंद
तेरी भी रक्षा करेंगे मुकुंद
समय बदलेगा और होगा तू खुशहाल
देख तेरे सामने है, जीवित मिसाल
हौसले से थोड़ी राहत मिली
दामाद की ख़ुशी से,बांछे खिली
होता जैसे डूबते को,तिनके का सहारा
ससुराल में नही, कोई आपसे प्यारा !!
सेठ
पुलकित बाबू बन रहे, देखो धन्ना सेठ
मेहनत जितनी कर ले, बढ़ जाता है वेट
अनगिनत चक्कर कोल्ड के
देखो ये लगाये
दाल-रोटी छोड़कर
धक्के कितने खाए !
वक़्त-बेवक्त जब मिल जाए, मेहनत की रोटी
मुर्ग-मुसल्लम से ज्यादा पौष्टिक वोही होती !
बातें सब ज्ञान की, होती है बेकार..
भोले से इस चहेरे को,अब करता नही कोई प्यार
कारण इसका एक ही.. ओ मम्मी के लाल
चिकने से चेहरे पर.. उगा लिए जो बाल !!
जीजा दोनों बैठे, देखो नीटली शेव्ड
मिल गई पत्नियाँ,कितनी वेळ बिहेव्ड
बाल वाले अक्सर ही, कहलाते है घनचक्कर
पूजा,वंदना
छोड़ लगाते, हनिप्रीत के चक्कर
सीधे-सादे रहिये, करों सादगी पर गौर..
ऐसी-वैसी छोड़ खोजिये, सोंढी-सोंढी “कौर” !
समर्थ
7-02-25
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