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24.4.25

सिल्वर जुबली

 


जब से देखा है तुझको मेरा ये दिल मचलता है

भोली सी इस सूरत पर न जाने क्यों फिसलता है,

भुला कर सबको मैंने बस..रखा याद है तुमको

मिला कर नज़रों से नज़रें..क्यूँ न हम खो जाए !!


जो तुम रूठों..जग रूठा, मुझे ऐसा ही लगता है

सदा हस्ता हुआ चहेरा मेरी आँखों को जचता है,

सताने में तुझे जो है मज़ा वो, कह नहीं सकते..

मोहब्बत का हर एक रंग, तेरे होठों पर फबता है !!


सालों ने नवाज़ा है मुझे इज्ज़त से इतनी जो

बेहद प्यारा था उनको..दिया साथी है मुझको वो,

देकर के मुझे एक गुल, वो आखिर बच नहीं सकते

गुलिस्तां जो उनका है..वो भी अब हमारा है !!


खुदा ये रात सारी..यूहीं आँखों में कट जाए,

दिलों पे छाई बदली, ग़मों की वो भी छट जाए

तुम्हें पानें की ख्वाइश थी मेरी सो,पा लिया तुमको..

यहीं ख्वाइश है मेरी अब..कि एक साली भी पट जाए !!


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है..

मगर धरती की बेचैनी को एक बादल समझता है

तू मुझसे दूर कैसी है.. मै तुझसे दूर कैसा हूँ..

ये तेरा दिल समझता है..या मेरा दिल समझता है !!


                                                               समर्थ

                                                                08-12-23


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