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14.5.26

कोई दीवाना PART 3

 

 

कसम खाएं खुदा कि या, तारे तोड़ कर लाएं

बहुत प्यारी हो तुम, तुम्हे कैसे ये समझाएं

कहने कि तमन्ना थी मेरे दिल में ये कबसे

मगर सोचा कहीं सुनकर कोई रूठ न जाए !

 

हुस्न की बात चले जब, तेरा चेहेरा ही दिखता है

करीब आए तू मेरे जब, मुझे पहेरा ही दिखता है

रहती है मेरे दिल में धडकनों से तू घुल-मिल कर

कोई चाहे न चाहे, जुदा हम हो नहीं सकते !

 

कि टुकड़ा चाँद का एक, बहुत प्यारा मिला मुझको

सितारों से करू तुलना या गुलाब कहूँ तुझको

चहकती है मेरे घर में कोई बुलबुल की तरह तू

मै बस इतना ही बोलू...I love YOU; I love YOU...

 

कोई दीवाना कहता है,कोई पागल समझता है

मगर धरती की बेचैनी को एक बादल समझता है

तू मुझसे दूर कैसी है.. मै तुझसे दूर कैसा हूँ..

ये तेरा दिल समझता है..या मेरा दिल समझता है !!



                                                                     समर्थ 

                                                                      15-03-26 

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