बच्चपन के दोस्त की ,
हो गई है शादी ,
बीबी उसकी नेक है,
बेहद सीधी - सादी !!
फ़ोन लगाकर कहती अक्सर ,
भैया घर कब आओगे ...
मेरे बनाए कबाब पराठे ,
अब फिर कब खाओगे !!
सुनकर इस प्रलोभन को ,
मुह में आता पानी ...
चिढ़कर पत्नी बोले हमसे ,
बहुत हुई मनमानी !!
नहीं ज़रुरत जाने की ,
न - ही कुछ खाने की ..
वज़न घटाने का है वादा ,
कैलोरीज़ इनमे कितनी जादा !!
सुन मधुर वाणी , मै ..
समझ गया अभिप्राय ...
परमेश्वर ..का सुख जो हरे,
वोहि पत्नी कहलाए !!
सुनकर इस प्रलोभन को ,
मुह में आता पानी ...
चिढ़कर पत्नी बोले हमसे ,
बहुत हुई मनमानी !!
नहीं ज़रुरत जाने की ,
न - ही कुछ खाने की ..
वज़न घटाने का है वादा ,
कैलोरीज़ इनमे कितनी जादा !!
सुन मधुर वाणी , मै ..
समझ गया अभिप्राय ...
परमेश्वर ..का सुख जो हरे,
वोहि पत्नी कहलाए !!
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