याद हमें, तुम आओगे,
हमको बहुत, रुलाओगे
ज्ञात नहीं था,मोल तुम्हारा..
यूँ "तारा" बन,अनमोल हो जाओगे।
याद हमें,तुम आओगे..!!
घर में, सबसे छोटे थे,
क्यों, आगे-आगे चल दिए..
यात्रा को, अंतिम अपनी,
बिन कहे, निकल लिए..
नहीं, उचित नहीं था, निर्णय यह ..
घाव अनगिनत, दे जाओगे।
याद हमें, तुम आओगे..!!
बहन-बहनोई, भाभी-भईया,
सब देखते रह गए !
मम्मी-पापा की, गोद से निकल
क्यों गंगा में, समां गए
धैर्यवान, तुम सदा से थे..
क्यों, व्याकुल से हो जाओगे!
याद हमें, तुम आओगे..!
ऋचा के नहीं, अनुज थे मेरे
इतना वक़्त, तो दे देते,
प्राण-रक्षा के कुछ प्रयास,
हम सब भी कर लेते..
ह्रदय-घात के साथ, तुम यूँ..
चिर-निद्रा में सो जाओगे।
याद हमें, तुम आओगे..!
'नीतिका' के अभिमान, थे तुम
देवस्य की मुस्कान, थे तुम
मानवीय गुणों से परिपूर्ण,
एक सरल-सीधे इंसान, थे तुम
श्रद्धा सुमन करते हैं, अर्पण तुमको,
मोक्ष शीघ्र ,तुम पाओगे!
याद हमें, तुम आओगे..!
ऋचा-समर्थ
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