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10.5.25

चेतावनी (इंडो-पाक युद्ध 2025)

 


टूट कर हमसे ही टुकड़ा, एक ऐसा ऐठा

डर छुपाकर, गोद में चीन की जा बैठा


ज्ञात नहीं है दुष्ट को,यह हिमाक़त पड़ जाएगी भारी

‘रूस-भारत’ की जोड़ी ऐसी, जैसे ‘जय-वीरू’ की यारी !


रूखी रोटी खा कर जैसे-तैसे,जीवन यापन तो कर लोगे 

कंठ सुखा अपनों का क्या? आँखों का पानी भी हर लोगे !


जतन जितने चाहे कर लो,अंत तुम्हारा लिख देंगे

खैरात के यह गोला-बारूद,मोहलत तुमको क्या देंगे


खेल-खेल में मिट जाओगे, नादानी छोड़ो यारा ..

नतमस्तक हो समर्पण कर, जीवनदान पाओ दुबारा !!

 

 

समर्थ रस्तोगी


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